संदेश

2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जम्मू दर्शन- चले चलिए मेरे साथ

चित्र
भारतवर्ष के मुकुट जम्मू कश्मीर का प्रवेश द्वार है जम्मू ।तवी नदी के किनारे पर इसे सूर्यवंशी राजा जम्बूलोचन द्वारा बसाया गया। इसे पहले जंबू पुरा और फिर जम्बू और अब  वर्तमान में जम्मू कहते हैं। १. रघुनाथ मन्दिर यह जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू शहर के बस स्टैंड के निकट ही स्थित है। रामयंत्र के आधार पर निर्मित यह मन्दिर आकर्षक कलात्मकता का विशिष्ट उदाहरण है। रघुनाथ मंदिर भगवान श्री राम को समर्पित है। यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे प्रमुख एवं अनोखे मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को सन् 1835 में महाराज गुलाब सिंह ने बनवाना शुरू किया पर निर्माण की समाप्ति राजा रणजीत सिंह काल में हुई ।मन्दिर की दीवारों पर तीन तरफ से सोने की परत चढ़ी हुई है। रघुनाथ मन्दिर, जम्मू कश्मीर इसके अलावा मंदिर के चारों ओर लगभग पन्द्रह विशाल मन्दिर स्थित है जिनका सम्बन्ध रामायणकाल के देवी देवताओं  से हैं। मुख्य मन्दिर भगवान राम को समर्पित है। इस मन्दिर की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है की मन्दिर के तीन ओर का अन्दरूनी भाग सोने की चादरों से ढका हुआ है। इसके अतिरिक्त इसमें एक गैलरी है जिसमें अनेक शिवलिंग तथा सालि...

अवन्तिका देवी- जहाँ हुआ था रुक्मिणी हरण

चित्र
भारतीय संस्कृति में प्रत्येक दिन पर्व के रूप में मनाया जाता है जिनमें से चैत्र शुक्ल पक्ष से नवमी तिथि तक तथा आश्विन मास की शुक्ल पक्ष से नवमी तिथि तक नवरात्र पर्व मनाया जाता है।  उस दिन दुर्गा देवी का पूजन किया जाता है। भारतवर्ष में देवी के विभिन्न मंदिर बने हुये हैं, जिन पर श्रद्धालुओं की अपार संख्या रहती है। उनमें से ही एक मंदिर है- अवंतिका देवी  अवन्तिका गङ्गा घाट जिसके बारे में आज हम जानेंगे।  भौगोलिक स्थिति  होली पर्व पर शैलेंद्र शर्मा जी यह शक्ति धाम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर तहसील में आहार नामक स्थान पर है। जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर तथा अनूपशहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित है। प्रवेश द्वार किवदंती   मन्दिर के गर्भगृह के बाहर कहा जाता है कि महाभारत काल में रुक्मिणी जी का हरण इसी स्थान पर किया गया था। रुक्मिणी जी भीष्मक की पुत्री थीं,  जिनका भाई शिशुपाल से इनका विवाह करना  चाहता था किंतु क्योंकि वह ठीक नहीं था इसलिए रुक्मिणी जी ने ब्राह्मण द्वारा एक पत्र भगवान श्री कृष्ण के लिए भेजा, जिसमें उन्होंने उनसे विवाह के विषय में कहा था अतः...

वज्रेश्वरी देवी- एक भव्य शक्तिपीठ

चित्र
भारतीय संस्कृति में माँ को विशेष महत्व दिया गया है; इसलिए नवरात्रों का विधान किया गया है। सभी को माँ से कल्याणकारी प्रार्थना करनी चाहिए। उत्तर भारत में माँ दुर्गा के वज्रेश्वरी धाम ( जिसे आप सभी नगरकोट वाली माता के नाम से परिचित हैं) के प्रति लोगों में विशेष श्रद्धा है। अतः आज मैं आपको माँ दुर्गा के इस पावन धाम के विषय में बताऊंगा।  काँगड़ा मन्दिर परिसर 🚩🚩🚩🚩🚩जय माता दी।🚩🚩🚩🚩🚩🚩 भौगोलिक स्थिति:- यह शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्थित है। यहाँ से चामुण्डा देवी मन्दिर20 किलोमीटर और ज्वालामुखी मन्दिर 35 किलोमीटर की दूरी पर है। माँ वज्रेश्वरी देवी मन्दिर, काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश                                पौराणिक महत्व:- जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ विध्वंस के बाद जब सती ने यज्ञाग्नि में स्वयं को समर्पित किया तब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर घूमे। शिव जी का क्रोध शांत करने के लिए भगवान विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खण्ड खण्ड कर दिया। शरीर के जो भाग जिस स्थान पर गिरे,...