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श्रीनाथ मंदिर-अजब कुमारी की गजब प्रेम कथा

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भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं अपरंपार हैं। उनकी लीलाओं को मनोहारी वर्णन शास्त्रों में हुआ है। द्वापर कालीन लीलाओं की छाप गिरिराज जी गोवर्धन पर आज भी दिखाई देती है। उन्हीं में से एक है गिरिराज जी गोवर्धन पर्वत यानी राधा कृष्ण के प्रेम का प्रमाण गोवर्धन जतीपुरा मुखारविंद पर स्थित है भगवान श्री नाथ का यह मंदिर। भौगोलिक स्थिति:- गोवर्धन मथुरा जिले से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित है  प्रेम गुफा:- यहाँ भगवान श्री कृष्ण स्वयं नाथों के नाथ भगवान श्री नाथ के रूप में विराजमान हैं। यह विशेष रूप उस समय का है जब देवराज इंद्र के क्रोध से व्रजवासियों को बचाने के लिए मात्र 7 वर्ष की आयु में अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी कनिष्ठिका अंगुली पर गिरिराज गोवर्धन को धारण किया था। वे भगवान ही श्रीनाथ के रूप में श्री नाथद्वारा में विद्यमान हैं। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के अनुसार श्रीनाथजी के प्रकट होने की कथा अत्यंत रोचक और अद्भुत है गोवर्धन नाथ की बाईं भुजा सर्वप्रथम 1409 ईस्वी को श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सूर्योदय के समय रविवार के दिन श्रवण नक्षत्र में दृष्टिगोचर हुई। इसके बाद प्रतिवर्ष नाग पंचम...

84 मन का अष्टधातु का घण्टा- कासगंज

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भारतवर्ष की भूमि अनेकों वीरों की कथाओं से भरी पड़ी है। भारतीय सैनिक अदम्य साहस का परिचय देते हैं।  वीरता की एक ऐसी ही धरोहर उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद में है। भौगोलिक स्थिति:- यह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में काली नदी के तट पर स्थित है। यह अलीगढ़ मण्डल में आता है। यहाँ किसी समय कांस(कुश) के जंगल हुआ करते थे इसलिए इसका नाम कासगंज पड़ गया। यह अलीगढ़ से पूर्व दिशा में है। धरोहर:- यहां गाँव नदरई के भीमसेन मंदिर में रखा हुआ है 84 मन का घंटा। इसे यहाँ म्यांमार की राजधानी रंगून से  दशकों वर्ष पूर्व एक वीर सैनिक ने अपनी वीरता दिखा कर के लाया था और उसे ब्रिटिश आर्मी ने उपहार में ही यह घण्टा दे दिया। लोग बताते हैं कि नदरई निवासी और ब्रिटिश आर्मी के कमांडर भीमसेन तिवारी द्वारा प्रथम एंग्लो बर्मी युद्ध के दौरान कोंगवोंग राजवंश और वर्मा की राजधानी मंडलय (प्राचीन नाम अमरापुर) के महामुनि मंदिर से युद्ध में विजय उपरांत ही है घंटा भारत लाया गया था। इस विशालकाय 84 मन यानी 3360 किलो के घंटे को ब्रिटिश आर्मी ने भीमसेन तिवारी के युद्ध कौशल से प्रभावित होकर उन्हें उपहार के रूप में सौंप दिया। त...