जागेश्वर ज्योतिर्लिंग- असीम शांतिपूर्ण
प्रकृति का नैसर्गिक सौंदर्य यदि आप देखना चाहते हैं तब आप हिमालय के ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भ्रमण कर सकते हैं वहां आपको कहीं देवदार और कहीं चीड़ के वनों के साथ साथ अनगिनत पक्षियों का कलरव सुनाई पड़ेगा तथा साथ ही वंदनीय नदियों की कल कल सुनाई देगी। यहां का अद्भुत सौंदर्य ऐसा है कि देवता भी यहां पर निवास करते हैं। इसी कारण से इसे देवभूमि देव हिमालय के नाम से भी पुकारते हैं। आप शांति का अनुभव करना चाहते हैं तब आप उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम की ओर जा सकते हैं। पौराणिक महत्व:- पुराणों के अनुसार इस स्थान पर यागेश्वर या जागेश्वर नामक शिवलिंग अवस्थित है जिसे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। शिवपुराण की कोटिरुद्रसंहिता में वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने। अर्थात देवदार के वन में यह शिवलिंग स्थापित है। भौगिलिक स्थिति:- कुमाऊँ के सबसे प्राचीन नगर के नाम से अल्मोड़ा को मंदिरों का शहर भी कहते हैं । यह कुमाऊँ की राजधानी रहा है। 1563 में राजा बालो कल्याण चन्द ने अल्मोड़ा को बसाया था। जागेश्वर मंदिर समूह:- इस मन्दिर समूह में छोटे-बड़े 124 मंदिर बताए जाते हैं।...