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वृन्दावन कुम्भ-- ब्रज का पावन उत्सव

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 क्या आश्चर्य में पड़ गये? कुंभ और वह भी वृंदावन में।   जी हां! आपने सही सुना। वृंदावन में 12 वर्ष बाद हरिद्वार कुंभ से पूर्व माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वसंत पंचमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक लगने वाला कुंभ मेला ब्रज का  पावन उत्सव है। आज हम आपको वृंदावन कुंभ के विषय में बता रहे हैं तो चलिए चलते हैं --------------वृंदावन कुंभ। आयोजन समय:- यह कुंभ मेला तब आयोजित किया जाता है,जब पूरे माह सूर्य व बृहस्पति कुंभ राशि में स्थिर रहते हैं तथा फाल्गुनी अमावस्या को चंद्रमा भी उस में प्रवेश कर जाते हैं। मान्यता है कि इस पुण्य काल में यमुना के जल में अमृत की धारा बहती है जिसमें स्नान करने हेतु ब्रह्मा विष्णु महेश सहित 33 कोटि देवी देवता पधारते हैं। कुम्भ मेले की नींव सन्तों द्वारा:- श्री वृंदावन को लांघकर हरिद्वार कैसे जाया जाए?  इसी भावना को ध्यान में रखकर वृंदावन में कुंभ मेले की नीव वैष्णव संतो द्वारा डाली गई थी। हरिद्वार कुंभ से पूर्व माघ शुक्ल पंचमी से फागुन शुक्ल पूर्णिमा तक यमुना के तट पर कई एकड़ भूमि में कुंभ मेले का आयोजन होता है। इसमें चारों संप्रदायों और मध्ययुगीन स...