84 मन का अष्टधातु का घण्टा- कासगंज
भारतवर्ष की भूमि अनेकों वीरों की कथाओं से भरी पड़ी है। भारतीय सैनिक अदम्य साहस का परिचय देते हैं। वीरता की एक ऐसी ही धरोहर उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद में है।
भौगोलिक स्थिति:-
यह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में काली नदी के तट पर स्थित है। यह अलीगढ़ मण्डल में आता है। यहाँ किसी समय कांस(कुश) के जंगल हुआ करते थे इसलिए इसका नाम कासगंज पड़ गया। यह अलीगढ़ से पूर्व दिशा में है।
धरोहर:-
यहां गाँव नदरई के भीमसेन मंदिर में रखा हुआ है 84 मन का घंटा। इसे यहाँ म्यांमार की राजधानी रंगून से दशकों वर्ष पूर्व एक वीर सैनिक ने अपनी वीरता दिखा कर के लाया था और उसे ब्रिटिश आर्मी ने उपहार में ही यह घण्टा दे दिया।
लोग बताते हैं कि नदरई निवासी और ब्रिटिश आर्मी के कमांडर भीमसेन तिवारी द्वारा प्रथम एंग्लो बर्मी युद्ध के दौरान कोंगवोंग राजवंश और वर्मा की राजधानी मंडलय (प्राचीन नाम अमरापुर) के महामुनि मंदिर से युद्ध में विजय उपरांत ही है घंटा भारत लाया गया था।
इस विशालकाय 84 मन यानी 3360 किलो के घंटे को ब्रिटिश आर्मी ने भीमसेन तिवारी के युद्ध कौशल से प्रभावित होकर उन्हें उपहार के रूप में सौंप दिया। तिवारी जी ने 1880 में अपने पैतृक स्थान पर स्थित देवी मां के मंदिर में स्थापित किया। इस घण्टे पर उर्दू, हिन्दी और बर्मीज तीन भाषाएँ लिखी हुई हैं।
पिछले 195 साल से यह घंटा कासगंज के अलावा दूर-दूर तक श्रद्धा का केंद्र है। प्रत्येक वर्ष होली के बाद आने वाले मंगलवार को घंटे की वर्षगांठ के रूप में मेला लगाया जाता है। जो प्रत्येक वर्ष वीरता की याद दिलाता रहता है।
इसके साथ ही मंदिर में अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं लगी हुई हैं किन्तु दुर्भाग्य है कि यह मन्दिर व्यक्तिगत देखरेख में है अतः खंडहर होता जा रहा है। प्रशासन को इसकी देखरेख कर धरोहर को बचाना चाहिए।
कैसे पहुँचे:-
यह मंदिर कासगंज से पश्चिम में 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह नदरई के मेन चौराहे समीप ही है।
मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़पथिक
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