पटना पक्षी विहार- कलरव करते पक्षियों का बसेरा
प्रकृति का अद्भुत सौन्दर्य देखना है तो आप पहाड़ों, समुद्री झीलों के आसपास जाते हैं किंतु यदि मैदानों की बात की जाए तो आप किसी झील के किनारे समय बिता कर देखें।
हम आज आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताएंगे।
इस स्थान का नाम है- पटना पक्षी विहार
पटना नाम सुनते ही आप इसे बिहार की राजधानी समझने की भूल न करें। यह बिहार की राजधानी पटना नहीं बल्कि एटा जनपद के जलेसर से 5 किलोमीटर दूर पटना गाँव में स्थित है। अलीगढ़ से इसकी दूरी लगभग 68 किलोमीटर तथा हाथरस से 29 किलोमीटर है।
यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है, जिसकी स्थापना वर्ष 1991में हुई।
विहार में प्रवेश के लिए भ्रमण पर्ची शुल्क देकर अवश्य प्राप्त कर लें।
महादेव मन्दिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं देना।
यहाँ की झील तथा वहाँ लगे हुए खजूर के पेड़ों की खूबसूरती देखते ही बनती है। चारों और पक्षियों का कलरव आपके रोमांच को बढ़ा देगा।
खजूर के वृक्ष, पटना पक्षी विहार
यहाँ आने के लिए नवम्बर से फरवरी तक का समय बहुत उपयुक्त रहता है।
झील में क्रीड़ा करते भारतीय पक्षियों जैसे सारस, बत्तख, सुर्खाब, मैना, कूट, नीलकंठ, पेंटेड स्टार्क आदि के साथ साथ विदेशी पक्षियों जैसे पेलिकन, गीजन, स्पोर्टबिल, हेडेड गूज आदि भी मन मोह लेते हैं।
इस पक्षी विहार में रूस, भूटान, ऑस्ट्रेलिया, चीन , म्यांमार, तिब्बत आदि देशों की प्रजातियां प्रत्येक वर्ष आतीं हैं।
पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मन्दिर
इसी पक्षी अभ्यारण्य में एक प्राचीन शिवमन्दिर पूर्ण इच्छेश्वर नाम से बना हुआ है, जिसको महाभारत काल का बताया जाता है। कहा जाता है कि यहाँ इच्छाएँ पूर्ण होती है इसलिए इसका नाम पूर्ण इच्छेश्वर है।
मन्दिर में एक बड़े शिवलिंग के दर्शन किये जा सकते हैं । इसके साथ ही मन्दिर परिसर में राधा कृष्ण तथा दुर्गा आदि के दर्शन भी होते हैं।
मनोज कुमार झा"मनु"
अलीगढ़
उत्तर प्रदेश
भारत
हम आज आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताएंगे।
इस स्थान का नाम है- पटना पक्षी विहार
पटना नाम सुनते ही आप इसे बिहार की राजधानी समझने की भूल न करें। यह बिहार की राजधानी पटना नहीं बल्कि एटा जनपद के जलेसर से 5 किलोमीटर दूर पटना गाँव में स्थित है। अलीगढ़ से इसकी दूरी लगभग 68 किलोमीटर तथा हाथरस से 29 किलोमीटर है।
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| पटना पक्षी विहार का प्रवेश द्वार, जलेसर(एटा, उत्तर प्रदेश) |
यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है, जिसकी स्थापना वर्ष 1991में हुई।
विहार में प्रवेश के लिए भ्रमण पर्ची शुल्क देकर अवश्य प्राप्त कर लें।
महादेव मन्दिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं देना।
यहाँ की झील तथा वहाँ लगे हुए खजूर के पेड़ों की खूबसूरती देखते ही बनती है। चारों और पक्षियों का कलरव आपके रोमांच को बढ़ा देगा।
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| पटना पक्षी विहार का एक दृश्य |
खजूर के वृक्ष, पटना पक्षी विहार
यहाँ आने के लिए नवम्बर से फरवरी तक का समय बहुत उपयुक्त रहता है।
झील में क्रीड़ा करते भारतीय पक्षियों जैसे सारस, बत्तख, सुर्खाब, मैना, कूट, नीलकंठ, पेंटेड स्टार्क आदि के साथ साथ विदेशी पक्षियों जैसे पेलिकन, गीजन, स्पोर्टबिल, हेडेड गूज आदि भी मन मोह लेते हैं।
इस पक्षी विहार में रूस, भूटान, ऑस्ट्रेलिया, चीन , म्यांमार, तिब्बत आदि देशों की प्रजातियां प्रत्येक वर्ष आतीं हैं।
पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मन्दिर
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| पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मन्दिर, पटना पक्षी विहार |
इसी पक्षी अभ्यारण्य में एक प्राचीन शिवमन्दिर पूर्ण इच्छेश्वर नाम से बना हुआ है, जिसको महाभारत काल का बताया जाता है। कहा जाता है कि यहाँ इच्छाएँ पूर्ण होती है इसलिए इसका नाम पूर्ण इच्छेश्वर है।
मन्दिर में एक बड़े शिवलिंग के दर्शन किये जा सकते हैं । इसके साथ ही मन्दिर परिसर में राधा कृष्ण तथा दुर्गा आदि के दर्शन भी होते हैं।
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| पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार |
मनोज कुमार झा"मनु"
अलीगढ़
उत्तर प्रदेश
भारत














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