पाताल खेड़िया ---शिवपुत्र कार्तिकेय जी की जन्मस्थली
किवदंती है कि यह शिवपुत्र कार्तिकेय जी की जन्मस्थली है। तथा कुमार कार्तिकेय ने यहीं पर ताड़कासुर का वध करने के पश्चात प्रायश्चित किया था।
स्थिति:-
यह स्थान अलीगढ़ मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर तहसील इगलास के गांव सहारा खुर्द के पाताल खेड़िया में है।
एक नहीं तीन शिवलिंग-----
पुराणों के अनुसार, ताड़कासुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु शिवपुत्र के हाथों होगी। अतः कार्तिकेय ने उस राक्षस का वध कर ऋषि मुनियों को उसके आतंक से मुक्त किया ।
ताड़कासुर के आतंक से मुक्ति तो मिल गयी किन्तु कार्तिकेय जी को जब यह विदित हुआ कि वह शिवभक्त था, तब उन्होंने प्रायश्चित करने का निर्णय लिया और भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा तीन शिवलिंग कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर और कपिलेश्वर की स्थापना की।
इनके अलग अलग मन्दिर कुछ दूरी पर देखे जा सकते हैं। सभी शिवलिंगों की ऊंचाई 4-5 फुट है।
एक अन्य नाम गुप्त तीर्थ स्थल
कहा जाता है कि जब कार्तिकेय जी ने प्रायश्चित करने के लिए यहाँ सभी तीर्थों को बुलाया तब ब्रह्मा जी ने विधिवत पूजन कर इस तीर्थ को भी सभी तीर्थों के बराबर का वरदान दे दिया किन्तु धर्मराज ने किसी बात से नाराज होकर श्राप दे दिया कि कलयुग में यह तीर्थ गुप्त रहेगा। इससे कार्तिकेय जी अप्रसन्न हो गए तब विष्णु जी के हस्तक्षेप से धर्मराज ने श्राप में किंचित परिवर्तन कर दिया और कहा कि कलयुग में यह गुप्त रहेगा किन्तु यहां के स्तम्भ सदैव रहेंगे।
"बै" माता का एकमात्र मन्दिर----
ब्रज में मान्यता है कि जब बच्चे रोते हैं तब कहते हैं "बै" माता रुला रही है। यही माता बच्चे का भाग्य लिखती हैं। देश में एकमात्र मन्दिर है जहाँ शिव जी के साथ "बै" माता की पूजा की जाती है। कुमारेश्वर शिवमन्दिर में एक स्तम्भ है जिसे बै माता कहते हैं।
महाशिवरात्रि पर्व पर लगता है मेला-----
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार तथा महाशिवरात्रि पर्व पर अभिषेक करने वालो की कतार लग जाती हैं। गंगा जी से काँवड़ में गंगाजल लाकर यहाँ अभिषेक किया जाता है।
मन्दिर परिसर में एक छोटी सी गुफा भी है, जिसमें एक मिट्टी की मूर्ति बनी हुई है।
मनोज कुमार झा"मनु"
अलीगढ़
उत्तर प्रदेश
भारत
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| शिवपुत्र कार्तिकेय जी की जन्मस्थली |
स्थिति:-
यह स्थान अलीगढ़ मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर तहसील इगलास के गांव सहारा खुर्द के पाताल खेड़िया में है।
एक नहीं तीन शिवलिंग-----
पुराणों के अनुसार, ताड़कासुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु शिवपुत्र के हाथों होगी। अतः कार्तिकेय ने उस राक्षस का वध कर ऋषि मुनियों को उसके आतंक से मुक्त किया ।
ताड़कासुर के आतंक से मुक्ति तो मिल गयी किन्तु कार्तिकेय जी को जब यह विदित हुआ कि वह शिवभक्त था, तब उन्होंने प्रायश्चित करने का निर्णय लिया और भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा तीन शिवलिंग कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर और कपिलेश्वर की स्थापना की।
इनके अलग अलग मन्दिर कुछ दूरी पर देखे जा सकते हैं। सभी शिवलिंगों की ऊंचाई 4-5 फुट है।
एक अन्य नाम गुप्त तीर्थ स्थल
कहा जाता है कि जब कार्तिकेय जी ने प्रायश्चित करने के लिए यहाँ सभी तीर्थों को बुलाया तब ब्रह्मा जी ने विधिवत पूजन कर इस तीर्थ को भी सभी तीर्थों के बराबर का वरदान दे दिया किन्तु धर्मराज ने किसी बात से नाराज होकर श्राप दे दिया कि कलयुग में यह तीर्थ गुप्त रहेगा। इससे कार्तिकेय जी अप्रसन्न हो गए तब विष्णु जी के हस्तक्षेप से धर्मराज ने श्राप में किंचित परिवर्तन कर दिया और कहा कि कलयुग में यह गुप्त रहेगा किन्तु यहां के स्तम्भ सदैव रहेंगे।
"बै" माता का एकमात्र मन्दिर----
ब्रज में मान्यता है कि जब बच्चे रोते हैं तब कहते हैं "बै" माता रुला रही है। यही माता बच्चे का भाग्य लिखती हैं। देश में एकमात्र मन्दिर है जहाँ शिव जी के साथ "बै" माता की पूजा की जाती है। कुमारेश्वर शिवमन्दिर में एक स्तम्भ है जिसे बै माता कहते हैं।
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| बै माता की प्रतिमा |
महाशिवरात्रि पर्व पर लगता है मेला-----
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार तथा महाशिवरात्रि पर्व पर अभिषेक करने वालो की कतार लग जाती हैं। गंगा जी से काँवड़ में गंगाजल लाकर यहाँ अभिषेक किया जाता है।
मन्दिर परिसर में एक छोटी सी गुफा भी है, जिसमें एक मिट्टी की मूर्ति बनी हुई है।
मनोज कुमार झा"मनु"
अलीगढ़
उत्तर प्रदेश
भारत
















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