रंगनाथ जी मन्दिर--- उत्तर भारत का दिव्य देश

भगवान नारायण के लोक को दिव्य देश के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। दिव्य देश की पहचान पांच प्रमुख स्तम्भों ,जिनको आप मन्दिर परिसर में देख सकते हैं। इसकी पूर्णता के लिए मन्दिर परिसर में गरुण स्तम्भ, गोपुरम, पुष्करणी, पुष्प उद्यान और गोशाला होना अनिवार्य है।

ऐसे दक्षिण भारत की संस्कृति के दर्शन के लिए चले आइए--वृन्दावन में।
और देखिए कृष्ण की अद्भुत लीलाओं का दर्शन मन्दिर की अद्भुत शैली में।


ब्रह्मोत्सव के समय प्रकाश से सज्ज द्वार।            

भौगोलिक स्थिति:--
                        यह मन्दिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के वृन्दावन में स्थित है।





187 वर्ष पूर्व मन्दिर निर्माण:-----
                     यह मन्दिर  श्री सम्प्रदाय के संस्थापक रामानुजाचार्य जी से सम्बंधित है। मन्दिर निर्माण श्रीरंगदेशिक स्वामी ने मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद,  राधाकृष्ण और गोविंद दासजी सहायता से कराया।
                      रंग जी मन्दिर के अभिलेखों से विदित होता है कि श्रीरंगदेशिक स्वामी जी का जन्म चेन्नई के अगरम गांव में हुआ था। वे उत्तर भारत की यात्रा करते हुए गोवर्धन पहुंचे।

                 मन्दिर परिसर में स्थित सरोवर

यह मन्दिर संस्कृत के उद्भट आचार्य स्वामी रंगाचार्य द्वारा दिये गए चेन्नई के रंगनाथ मन्दिर की शैली में बना हुआ है।




"ब्रह्मोत्सव"-- मन्दिर का सबसे बड़ा रथ मेला
                        ब्रह्मोत्सव होली के तीसरे दिन से आरम्भ होकर दस दिन तक चलता है। इस मेले में कभी भरतपुर महाराज का सैनिक दस्ता और बैंड का प्रदर्शन करता था।

ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम की झलकियां
ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम में गजराज के साथ












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