खेरेश्वरधाम शिव मन्दिर- अलीगढ़, आक्रांता गजनवी को नहीं मिला शिवलिंग का छोर

 श्रावणमास में भगवान शिव की भक्ति से वातावरण गुंजायमान रहता है। प्राय: सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
 शिव की महिमा अद्भुत है। हम आज आपको शिव महिमा वाले एक धाम के विषय में बताएंगे।
खेरेश्वरधाम मन्दिर परिसर में             

भौगोलिक स्थिति:-
                        यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित है इसकी दूरी अलीगढ़ बस स्टैंड से लगभग 6 किलोमीटर दूर खैर रोड पर स्थित है।
प्रवेश द्वार                                                         

धाम की विशेषता:-
                        आज जहां खेरेश्वर धाम स्थित है, वहीं पर अकबर के नवरत्न तानसेन और बैजू बावरा के गुरु संगीत सम्राट स्वामी हरिदास जी महाराज का जन्म भी हुआ था। इसी स्थान पर अंग्रेजों के शासन काल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गुप्त बैठक हुआ करती थीं।
 स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में विख्यात अलीगढ़ के स्टेशन बम कांड की योजना क्रांतिकारियों ने इसी मंदिर में बैठकर बनाई थी और काकोरी कांड के नायक सरदार भगत सिंह भी यहां काफी दिन रहे।
यह शिव मंदिर बहुत प्राचीन है। शिव मंदिर के 8 द्वार हैं। सावन के महीने में हज़ारों कांवरिया यहां जल चढ़ाने आते हैं। यहां पर देव छठ का मेला भी लगाया जाता है।
वैसे यह मन्दिर भगवान शिव के साथ साथ दाउ जी महाराज के लिए भी प्रसिद्ध है।
दाउ जी मन्दिर         

दाउ जी महाराज       

लोक प्रचलित कथा:-
                            कहां जाता है कि यहां चारों ओर जंगल था । वहां पर एक ग्वाला गाय चराने आता था। झाड़ियों के बीच से ऊंचा सा पत्थर लगा हुआ था, जो कि शिवलिंग था।इस पर गाय स्वतः ही अपना दूध चढ़ा देती। ग्वाला इस बात से अनभिज्ञ था।  जब गाय घर जाकर दूध ना देती तो ग्वाले पर डांट पड़ती कि तुम दूध पी जाते हो । उन्होंने गाय पर दृष्टि रखनी शुरू की और देखा गाय स्वतः ही दूध चढ़ा रही है। यह बात गांव में बताई तो किसी को इस पर विश्वास नहीं हुआ ।फिर गांव वालों ने चुपके से गाय को यह सब करते देख लिया तब पता लगा कि वह साधारण पत्थर नहीं शिवलिंग है ।शिवलिंग को खोजना शुरू किया कोई अंत ना देखा तो  सब लोगों की श्रद्धा बढ़ गयी।
मुख्य प्रवेश द्वार                    

कहा यह भी जाता है कि भगवान श्री कृष्ण और बलराम जी भी यहाँ पधारे । तब उन्होंने यहाँ कोल(अलीगढ़ का पुराना नाम कोल ही था, जोकि आज तहसील के रूप में जानी जाती है) नामक राक्षस का वध करके अपना हल हलदुआ हरदुआगंज में धोया।
                       
इतिहास की दृष्टि:-
                       इस धाम पर महमूद गजनवी की कुदृष्टि पड़ी थी। गजनबी उस समय देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को नष्ट करने के लिए निकल पड़ा था। 1017 में महमूद गजनबी ने मथुरा और अलीगढ़ के धार्मिक स्थलों पर आक्रमण कर दिया । मथुरा में वासुदेव मंदिर और अलीगढ़ में खेरेश्वर धाम मंदिर पर उसकी सेना पहुंच गई।
मुख्य शिव मन्दिर           

बताया जाता है कि धार्मिक स्थलों को जब वह नष्ट कर रहा था तब हरिदासपुर समेत आसपास के गांव के लोग आशंकित हो गए। उन्हें भय था कि कहीं शिवलिंग को नष्ट ना कर दे ।खेरेश्वर धाम पहुंचने पर गजनबी की सेना ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद शिवलिंग को हटाने की कोशिश की किंतु 2 दिनों तक सेना ने खुदाई की, किंतु कोई छोर ना मिल सका और अंत में थक हार कर के गजनवी यहां से वापस लौट गया।
मुख्य शिवलिंग           

शिव जलाभिषेक करते मनु झा    

मुख्य शिवलिंग               

जलाभिषेक करते घुमक्कड़ मित्र शैलेन्द्र जी            

परिसर में स्थित अन्य मन्दिर:-
                         मन्दिर परिसर में भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण जी का, राधाकृष्ण एवं दुर्गा जी का मन्दिर बायीं ओर बने हुए हैं। इन तीनों मन्दिरों की दूसरी मंजिल पर भगवान विष्णु जी का मन्दिर बना हुआ है।
कान्हा संग हरिदास जी महाराज       

                       इसके साथ ही हनुमान जी, बलराम जी तथा कान्हा के साथ हरिदास जी की मूर्ति भी प्रतिष्ठित है। एक छोटा सा तालाब है जिसके पास ही दो तीन और मन्दिर बने हुए हैं। सोमवार के दिन विशेष रूप से चहल पहल रहती है।


मन्दिर परिसर की कुछ झलकियां:-
शिव विग्रह, मन्दिर परिसर    

सरोवर के साथ मन्दिर     

दाउ जी महाराज जी का विग्रह       

उपनेत्र में घुमक्कड़ पथिक मनु

विशाल वट वृक्ष, मन्दिर परिसर       

कान्हा संग संगीत सम्राट    

                            शांति के क्षणों में हरी दूब पर   
शिवरात्रि पर्व पर         

मेले का एक दृश्य 

एक दृश्य 

शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालु     


जय शिव शम्भू

मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़ पथिक                      

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