जम्मू दर्शन- चले चलिए मेरे साथ


भारतवर्ष के मुकुट जम्मू कश्मीर का प्रवेश द्वार है जम्मू ।तवी नदी के किनारे पर इसे सूर्यवंशी राजा जम्बूलोचन द्वारा बसाया गया। इसे पहले जंबू पुरा और फिर जम्बू और अब  वर्तमान में जम्मू कहते हैं।

१. रघुनाथ मन्दिर

यह जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू शहर के बस स्टैंड के निकट ही स्थित है।

  • रामयंत्र के आधार पर निर्मित यह मन्दिर आकर्षक कलात्मकता का विशिष्ट उदाहरण है। रघुनाथ मंदिर भगवान श्री राम को समर्पित है।
  • यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे प्रमुख एवं अनोखे मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को सन् 1835 में महाराज गुलाब सिंह ने बनवाना शुरू किया पर निर्माण की समाप्ति राजा रणजीत सिंह काल में हुई ।मन्दिर की दीवारों पर तीन तरफ से सोने की परत चढ़ी हुई है।

  • रघुनाथ मन्दिर, जम्मू कश्मीर


  • इसके अलावा मंदिर के चारों ओर लगभग पन्द्रह विशाल मन्दिर स्थित है जिनका सम्बन्ध रामायणकाल के देवी देवताओं  से हैं।
  • मुख्य मन्दिर भगवान राम को समर्पित है। इस मन्दिर की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है की मन्दिर के तीन ओर का अन्दरूनी भाग सोने की चादरों से ढका हुआ है। इसके अतिरिक्त इसमें एक गैलरी है जिसमें अनेक शिवलिंग तथा सालिग्राम हैं। मन्दिर की दीवारों की कारीगरी आँखों को अपनी ओर तुरन्त आकर्षित कर लेती है। इस मन्दिर में एक पुस्तकालय भी है जिसमें संस्कृत की दुर्लभ पुस्तकें तथा पाण्डुलिपियाँ रखी हुई हैं।इस मन्दिर का निर्माण 1853 में जम्मू तथा कश्मीर राज्य के संस्थापक महाराजा गुलाब सिंह द्वारा प्रारम्भ कराया गया था और 1860 में उनके पुत्र महाराजा रणवीर सिंह द्वारा इसका निर्माण पूरा किया गया।

२.
        शिव पार्वती अमर मन्दिर 
यह शीशमहल मन्दिर के नाम से जाना जाता है। यह नाम इसमें शीशे के प्रयोग के कारण मिला है। इसमें शिव परिवार सहित भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम व बहन सुभद्रा जी के साथ विराजमान हैं।

शिव पार्वती अमर मन्दिर, जम्मू


 
शीशमहल मन्दिर, जम्मू




३. जामवन्त गुफा
इस मंदिर को जामवंत गुफा के नाम से भी जाना जाता है। जम्मू नगर के पूर्वी छोर पर बना हुआ है। इस गुफा में कई पीरों, फकीरों, और ऋषियों ने तपस्या की  इस कारण से इसका नाम पीर खोह् पढ़ गया। डोगरी भाषा में इसे खोह् गुफा भी बोलते है।
इसमें गुफा के अंदर शिव के साथ अन्य देवी देवता भी हैं।
यहाँ समीप ही एक उद्यान है, जिसमे एक विशाल त्रिशूल लगा हुआ है।
पीर खोह् तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु मुहल्ला पीर मिट्ठा के रास्ते गुफा तक जाते है। मंदिर की दीवारों पर देवी देवताओं के मनमोहक चित्र उकेरे गए हैं। आंगन में शिव मंदिर के सामने पीर पूर्णनाथ और पीर सिंधिया की समाधिंया हैं। जामवंत गुफा के साथ एक साधना कक्ष का निर्माण किया है। 

जो तवी नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है। यह गुफा घने जंगलो के बीच स्थित है। स्थानीय लोग मानते है कि यह मंदिर भारत के बाहर के मंदिरों और गुफाओं से जुड़ा हुआ है। हजारों भक्त हर साल यहां के मंदिर में पूजा करने आते है। 


विशाल त्रिशूल







४. हरकी पैड़ी मन्दिर
इसका नाम हरिद्वार के हरकी पैड़ी नाम से प्रेरित होकर रखा गया है। यह सूर्यपुत्री तवी नदी के तट पर स्थित है।
इसमें विशाल गणेश, वासुदेव कृष्ण,  विशाल बजरंगबली तथा शिवलिंग भी दर्शनीय है। निकट ही तवी के जल का स्पर्श भी किया जा सकता है।



तवी नदी के किनारे हरकी पैड़ी, जम्मू


५.बाहु किले का निर्माण राजा बाहुलोचन ने कराया था जो 3000 वर्ष पुराना है और यह तवी नदी के किनारे स्थित है। इसकी शानदार बनावट आसपास के क्षेत्रों की दृश्यावलियाँ देखने के लिए उपयुक्त हैं। शहर से 5 किमी दूर यहाँ देवी काली का मन्दिर है। इस किले का जीर्णोद्धार 19वीं शताब्दी में डोगरा शासकों ने कराया था जिसमें बाग-ए-बाहु नाम का एक बाग टेरेस (छज्जे) पर बनवाया गया।





बाग ए बाहु




बाग ए बाहु



कैसे पहुँचे:- जम्मू
घूमने के आप सीधे जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंच जाएं। यहाँ से आपको टैम्पो, टैक्सी आदि वाहन मिल जाएंगे।
यह सब बुकिंग होकर जाएंगे। यह आपको पांच छः घण्टे में लगभग पांच छः स्थानों पर घुमा देते हैं।




घुमक्कड़ पथिक
मनोज कुमार झा"मनु"

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
बहुत ही सुंदर लिखा है आपने , और विस्तार से सभी स्थलों के बारे मे अच्छे से जानकारी दी है

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