हरिद्वार महाकुंभ पर्व-2021
इस वर्ष महाकुंभ में सम्मिलित होने के लिए 8 अप्रैल के लिए रेल यान में आरक्षण एक माह पूर्व ही करवा दिया था। यह समय कोरोना का था चूँकि रेल यातायात सुचारू रूप से चल रहा था तो विचार किया कि चलते हैं हरिद्वार।
सबसे पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर उतरते ही RTPCR टेस्ट हुआ। उसके बाद ही शहर में प्रवेश हुआ।
मैं पूर्व में प्रयागराज महाकुम्भ 2019 कर चुका ही था।
भौगोलिक स्थिति:-
हरिद्वार उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
हरिद्वार का नामकरण:-
हरिद्वार में प्रति 12 वर्ष पर कुंभ का मेला लगता है। उसके छठे वर्ष अर्ध कुंभ पड़ता है। इस तीर्थ के कई नाम हैं - हरिद्वार,हरद्वार, गंगाद्वार, कुशावर्त। मायापुरी, हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर और भीमगोड़ा- इन पांचों पुरियों को मिलाकर हरिद्वार कहा जाता है।
हरिद्वार में कुंभ कब?
कुम्भराशिं गते जीवे तथा मेषे गते रवौ।
हरिद्वारे कृतं स्नानं पुनरावृत्तिवर्जनम्।।
अर्थात
कुम्भ राशि का बृहस्पति हो और मेष राशि में सूर्य संक्रांति हो, तब हरिद्वार कुम्भ में स्नान करने से मनुष्य पुनर्जन्म रहित हो जाता है।
पद्मिनी नायके मेषे कुम्भ राशिगते गुरौ।
गंगाद्वारे भवेद्योगः कुम्भ नामा तदोत्तम:।।
(स्कन्द पुराण)
''जिस समय बृहस्पति कुम्भ राशि पर स्थित हो और सूर्य मेष राशि पर रहे, उस समय गंगाद्वार अर्थात हरिद्वार में कुम्भ होता है।''
हरिद्वार कुम्भ पर्व के स्नान दिवस:-
यहाँ कुम्भ का प्रथम स्नान शिवरात्रि महापर्व, द्वितीय स्नान चैत्र की अमावस्या को और तृतीय स्नान अर्थात प्रधान स्नान चैत्र के अन्त में अथवा वैशाख के प्रथम दिन अर्थात जिस दिन बृहस्पति कुंभ राशि पर और सूर्य मेष राशि पर हों उस दिन कुम्भ स्नान होता है।
हरिद्वार भ्रमण:-
ब्रह्मकुंड(हरकी पैड़ी):-
सबसे पहले पतितपावनी माँ गंगा के निर्मल जल में स्नान किया। यहाँ हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड बहुत ही प्रसिद्ध है। ब्रह्मकुंड क्षेत्र में कई मन्दिर बने हुए हैं महाराज विक्रमादित्य के बड़े भाई भृतहरि ने यहाँ तप किया तथा महाराज विक्रमादित्य ने ही यहाँ घाटों का निर्माण कराया।
माँ गङ्गा की आरती यहीं पर होती है।
माँ मनसा देवी मंदिर:-
"बिल्व पर्वत" पर मां मनसा देवी का मंदिर एक सिद्ध पीठ है। यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रहती है। पैदल मार्ग से आप पर्वतों के सौंदर्य का आनंद लेते हुए मंदिर तक पहुंच सकते हैं। जहाँ से आप ऊपर से हरिद्वार जनपद का अद्भुत दृश्य देख सकते हैं। आपको ऐसा अनुभव होगा कि आप हरिद्वार की छत पर ही खड़े हैं। यहां आकर आप असीम शांति का अनुभव करेंगे।
माँ चण्डी देवी शक्ति पीठ:-
नील पर्वत पर मां चंडी देवी का शक्तिपीठ स्थित है यहां पहुंचने के लिए पैदल मार्च के साथ साथ उड़न खटोला से भी जा सकते हैं। यहां पास ही हनुमान जी की माता अंजना माई का मंदिर स्थित है। चंडी देवी पैदल मार्ग से पूर्व रास्ते में मां काली का शक्तिपीठ स्थित है।
उड़न खटोला(रज्जु मार्ग=रोप वे)
दोनों ही शक्तिपीठों पर आप आसानी से उड़न खटोला से पहुंच सकते हैं और अपना समय बचा सकते हैं।
हरिद्वार में कुछ अन्य दर्शनीय स्थल:-
इस कुंभ यात्रा से पूर्व हरिद्वार की कई यात्रायें कर चुका हूँ इसलिए अब अन्य स्थलों के बारे में जानकारी दूँगा, जो कि इस कुम्भ यात्रा से पूर्व भ्रमण कर चुका हूँ।
मायादेवी मन्दिर(शक्तिपीठ)
माया देवी के कारण ही हरिद्वार को मायापुरी नाम से भी जाना जाता है। माया देवी का मंदिर हर मिलाप चिकित्सालय के ठीक सामने पूर्व की ओर है। इस मंदिर में महामाया के अतिरिक्त चामुंडा मां दुर्गा और भद्रकाली की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। मायापुरी की माया देवी ही अधिष्ठात्री देवी हैं
यह एक सिद्ध पीठ है।
दक्ष मंदिर कनखल हरिद्वार की उपनगरी कनखल को कहा जाता है जो कि हरिद्वार से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हर की पेडी से इसकी दूरी 6 किलोमीटर है हरिद्वार के रेलवे स्टेशन से मायापुर फुल शंकराचार्य चौक होते हुए दक्षिण दिशा में कनखल की ओर आप जा सकते हैं यह अत्यंत प्राचीन दक्षेश्वर शिव मंदिर स्थापित है कनखल को भगवान शिव के ससुर राजा दक्ष की राजधानी कहा जाता है यहां पर एक भव्य मंदिर स्थापित है गंगा मंदिर के को स्पर्श करती हुई बह रही है।
सती कुंड दक्ष मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर सती कुंड है जहां बताते हैं कि सती ने अपने शरीर को योगाग्नि से जलाकर प्राणोत्सर्ग कर दिया था।
इंडिया टेम्पल
इस मंदिर में अनेक देवी देवताओं की विद्युत चालित अद्भुत मूर्तियां स्थापित हैं मंदिर प्रांगण बहुत ही सुंदर है।
वैष्णो देवी मंदिर
लाल माता ट्रस्ट द्वारा आधुनिक मंदिर बनाया गया जो कि आपको वैष्णो देवी जम्मू स्थित मंदिर का स्मरण कराता है।
भारत माता मंदिर-
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के शुभ प्रयासों के फलस्वरूप भारत माता मंदिर का स्वरूप सामने आया। राष्ट्र की एकता धार्मिकता व अखंडता को प्रदर्शत करने वाले गगनचुंबी मंदिर में यात्री एक ही स्थान पर महान व्यक्तियों वीरांगनाओं क्रांतिकारियों महापुरुषों का महान व्यक्तियों के दर्शन करके प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं सबसे नीचे के तल पर भारत माता की अद्भुत प्रतिमा तथा सबसे ऊपरी मंजिल पर भगवान शंकर की प्रतिमा है इस मंदिर में एक लिफ्ट लगी हुई है जिसमें सबसे पहले सभी मात्र ₹2 का शुल्क देकर सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुंच जाते हैं। उसके बाद धीरे-धीरे नीचे के तल पर आते हुए दर्शन करते हैं।
कुम्भ के समय शाही स्नान
सभी अखाड़े बारी बारी से स्नान करते हैं, जिस समय ये संन्यासी स्नान करते हैं तब प्रशासन आम श्रद्धालुओं को स्नान नहीं करने देते। वहाँ से सभी को हटा दिया जाता है। इन अखाड़ों की पेशवाई देखते ही बनती है।
शाही स्नान का सौभाग्य
इस वर्ष 12 अप्रैल 2021 को सोमवती अमावस्या का पावन दिन था उस दिन दूसरा शाही स्नान था ऐसे पुणे में काल में मुझे शाही स्नान का सौभाग्य प्राप्त हुआ सोमवती अमावस्या को तीर्थाटन स्नान जब पूजा पाठ एवं ब्राह्मणों को भोजन कराना वस्त्र आदि दक्षिणा सहित दान करना विशेष पुण्य माना गया है। इससे पूर्व भी प्रयागराज कुंभ 2019 में महाशिवरात्रि के दिन शाही स्नान का सौभाग्य प्राप्त हुआ लिंक देखें
https://ghumakkadpathik.blogspot.com/2020/05/2019.html
आप सभी को हर हर गंगे ।
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