चलो कान्हा बुलाता है-यात्रा वृत्तांत
कहीं भ्रमण किया जाये - ऐसा विचार कोरोना काल के समय लॉक डाउन २०२० से पहले ही चल रहा था किन्तु लॉक डाउन के कारण योजना स्थगित करनी पड़ी फिर स्थिति सामान्य होने पर हम सभी ने १४ फरवरी २०२१ दिन रविवार को रमण बिहारी गोकुल के लिए प्रस्थान किया।
यात्रा के लिए बस का प्रथम बिन्दु नौरंगराय पेट्रोल पम्प थी। बस एक दिन पूर्व सायं से ही खड़ी थी। बस का समय प्रातः काल ६ बजे दिया गया ; जिसमें हमारे प्रथम बिंदु के यात्री लगभग एक घंटे में आ गए। तीसरे बिंदु दुबे का पड़ाव पर सही समय पर सुप्रिया जी आ गईं किन्तु विलम्ब लगता देख वह द्वितीय बिंदु छर्रा अड्डा पुल पर पहुंच गयीं। इसके बाद बस दुबे का पड़ाव , हाथरस अड्डा , कायस्थ पाठशाला और सासनी गेट चौराहे पर पहुँची। यह हमारे बस रुट का अंतिम पड़ाव था और इसके साथ ही सभी कृष्ण भक्त बस में सवार हो गए।
यहाँ से बरखा जी के - बोलो बाँकेबिहारी लाल की जय घोष से यात्रा आरम्भ हुयी। अभी बस यात्रा आरम्भ ही हुयी थी कि निर्मल जी , गरिमा जी, प्रिन्सी जी आदि ने कृष्ण भक्ति रस में डूबे गीतों जैसे - तेरी बाँकी अदा ने ओ साँवरे मुझे तेरा दीवाना बना दिया द्वारा अंत्याक्षरी शुरू कर दी इसके साथ ही फ़िल्मी गीत भी कृष्णार्पण अर्थात कृष्ण को समर्पित करते हुए गाये गए।
इसी बीच बस राया के पास पहुंची वहाँ जाम लगा होने के कारण एक पापड़ , मक्के के फूला , मूँगफली आदि बेचने वाला बस के द्वार पर लटक गया।
मैंने कहा - यहाँ कोई कुछ नहीं ले रहा।
विक्रेता - (लटकते हुए ही) दरवाजा तो खोलो।
वह बहुत देर लटका रहा अंततः दरवाजा खोल दिया अब वह बेचने के लिए आवाज लगाता रहा और हम सब उससे मना करते रहे।
रीना जी बोलीं - सबके बैग में बिस्किट नाश्ता पानी सब है।
विक्रेता - अरे बोनी तो कर लूँ ।
तब उससे मक्के के फूला का एक पैकेट छोटी बच्ची को दिला दिया
तभी गरिमा जी बोलीं - अरे भइया ! अब तो चले जाओ तुम्हारी वजह से हम गा भी न पा रहे।
अब विक्रेता जाने लगा तभी सुप्रिया जी ने कबूतर जा जा जा कबूतर जा जा जा गीत शुरू कर दिया।
मैंने कहा - विक्रेता को कबूतर कह रहे हो?
वह चला गया इस प्रकार हास्य के वातावरण के बाद अंत्याक्षरी पुनः उसी क्रम से चलने लगी।
इसके बाद लगभग ११ बजे हम रमणरेती गोकुल पहुँच गए।योजनानुसार सभी रमण बिहारी जी के दर्शनार्थ बस से उतरे तथा वहीं पार्किंग स्थल पर ही समूह छायाचित्र खींच लिया।
अब सभी रमण बिहारी जी के दर्शन के लिए चल पड़े। जय श्री राधे जय श्री कृष्ण - कहते हुए मुख्य मंदिर परिसर में प्रवेश किया किन्तु अभी मुख्य मंदिर पर पर्दा लटका हुआ था।
हमारा कान्हा सताता बहुत है तभी कुछ देर प्रतीक्षा करने के बाद शीघ्र ही राधे राधे के तीव्र स्वर के साथ पर्दा हटता है और मनोहारी रमण बिहारी जी अपनी आराध्या सर्वेश्वरी राधा जी तथा साथ में अन्य गोप गोपियों के साथ विराजमान हो दर्शन दे रहे थे।
इतने में ही सभी गायब हो गए कोई भी वहां दिखाई नहीं दे रहा था। तभी मैंने नरेंद्र सर जी से पूछा- "कहां गए सब?
नरेंद्र सर बोले -कोई इधर है कोई उधर है। सब लगे हैं फोटो सेल्फी लेने में ।
इसके बाद नवग्रह मंदिर व शिव मंदिर के दर्शनों के पश्चात हम रेती की ओर गये जहां पहले से ही बहुत लोग ब्रज रज में लोट लगा रहे थे।
वहां के पंडा ने पूछा- यह सभी आपकी टीम में हैं।
मैंने कहा- हाँ।
उन्होंने कहा- बिठाओ एक जगह।
मैंने कहा - बिठ रहे हैं मतलब बैठ रहे हैं।
सब को एक जगह बिठाने पर भी दो समूह में बैठे गये।
पंडा ने ब्रजरज के विषय में बताया तथा कृष्ण को प्रणाम करते हुए हस्तकला भी कराई। और सबको हा हा हा हा कह कर हँसाया।
उसके बाद हम सब बस की और आए और वहां से भोजन लेते हुए रमण रेती के ही बिहारी कुंड की ओर प्रस्थान कर गए।
यहां सभी ने स्वयं ही भोजन व्यवस्था को संभालते हुए परस्पर स्वादिष्ट व्यंजन सभी को खिलाये जिनमें विशेष रूप से गरिमा जी, रीना जी इडली लेकर आए तथा बिना मिष्ठान के तो भोजन पूर्ण रहता है इसलिए हमारे नरेंद्र सर जी मोदक जी हां लड्डू लेकर आए थे।
भोजन करने के पश्चात सभी बिहारी कुंड वाह बिहारी उद्यान में पहुंचे यहां कोई कुंड की ओर तो कोई झूला झूलने का आनंद लेने लगे हम कुछ लोग कुंड की परिक्रमा करते हुए पतंजलि उद्यान पहुंच गए यहां सभी ने ब्रदर शिवलिंग को प्रणाम कर फोटो खिंचवा लो
यहां से सभी धीरे-धीरे चहल कदमी करते हुए आश्रम से बाहर आने लगे और सड़क की दूसरी ओर स्थित हिरण पार्क पर रुक गए यहां सभी ने हिरणों के गेहूं आदि खाद्य वस्तुएं लाइन
इसके बाद हम सभी 84 खंबा मंदिर के लिए प्रस्थान कर गए वहां मुख्य मंदिर के द्वार पर पंडा द्वारा बाहरी बिठा दिया गया और वहीं सभी को हटाते हुए उस स्थान के बारे में बताने लगे लेकिन हम ठहरे अलीगढ़ वाले कोई उनकी सुना नहीं रहा था सो पंडा जी बोले अरे आप तो सुनना ही नहीं चाहते हो मैंने उनसे कहा समय नष्ट करने से अच्छा है कि दर्शन कराए जाएं
उसके बाद हम सभी ने 84 खंबा मंदिर में स्थित भगवान के श्री विग्रह का दर्शन किया।
वहां से निकलने के बाद हम सभी चिंतामणि महादेव मंदिर पहुंच गए। लेकिन यह क्या? मैंने अचानक मुड़कर देखा तो पीतांबर मेरे पास खड़ा मुस्कुरा रहा है। उसने कहा- अच्छा लग रहा है मेरे साथ।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हां अच्छा लग रहा है।
कितना अच्छा लग रहा है?
बहुत।
किन्तु यह सब मेरी कल्पना थी।सभी धीरे-धीरे महादेव जी के दर्शन कर बस की ओर जाने लगे और कुछ यमुना घाट की ओर चले गए। यमुना में जल नहीं था। वहां पर बनी हुई छतरियों के पास छाया चित्र खींचने लगे।
इसके बाद यहां से हम सीधे दाऊजी बलदेव के लिए प्रस्थान किया। मंदिर के कपाट बंद थे। अतः सभी को बराबर में ही सरोवर की ओर ले गए। जहां एक समूह छायाचित्र भी लिया गया तथा जब तक कपाट खुलते तब तक सभी ने खरीददारी शुरू कर दी।
इसी बीच नेहा जी ने चाय पार्टी शुरू कर दी और मुझे भी चाय दी गई। मैंने भी चाय का आनंद लिया और उसके बाद दर्शन के लिए पंक्ति लगना शुरू हो गई थी।
सभी पंक्तिबद्ध होकर दर्शन के लिए चले गए। सभी ने बलराम जी के दर्शन रेवती मैया के साथ किए और यहां से निकल कर हम सीधे गृह नगर अलीगढ़ के लिए प्रस्थान किये।
बोलो राधा रमण बिहारी लाल की जय
जय जय श्री राधे
आचार्य मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़ पथिक
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बोलो बांके बिहारी लाल की जय l