भद्रकाली मन्दिर- जहाँ बारात पत्थर की हो गई

द्वापर युग में पांडवों के द्यूतक्रीड़ा में परास्त होने पर पांडवों को 12 साल का वनवास और 1 साल का अज्ञातवास भोगना पड़ा। इस दौरान पांडव वर्तमान हाथरस जिले सहपऊ कस्बे में एक मंदिर में भी रुके थे

इस मन्दिर का नाम है-प्राचीन सिद्धपीठ भद्रकाली मन्दिर।


भौगोलिक स्थिति:- 

यह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सहपू कस्बे में स्थित है। यह स्थान अलीगढ़ से 65 किलोमीटर और हाथरस से 35 किलोमीटर दूर जलेसर मार्ग पर स्थित है।





पत्थर बनी बारात

किवदंती है कि लगभग 450 साल पहले गांव में आने वाले बारातें मंदिर परिसर में ही रुक जाती थीं। एक बार यहां रुकी बरात में शामिल हुए लोग पूजा के लिए किशोरी से अभद्रता कर दी गई। 





इसके कारण भद्रकाली मां रुष्ट हो गईं और मां का प्रकोप से पूरी बारात पत्थर की हो गई।
इसकी सतहें आज भी मंदिर परिसर में दिखाई देती हैं मां की प्रतिमा के पास सीपल के पेड़ के नीचे यह पत्थर एक जगह पर है। 







बताया जाता है कि भद्रकाली मां के प्रकोप से बराती पत्थर के होने की घटना वैशाख पंचमी को हुई थीअतः इस दिन हर साल 3 दिन का मेला आयोजित किया जाता है





   मुख्य मन्दिर के निकट ही अन्य मंदिर भी बने हुए हैं जिनमें शिव परिवार, रामदरबार, राधाकृष्ण आदि बने हुए हैं










कथा कि सत्यता चाहे जो कुछ भी हो लेकिन पत्थरों को देखकर इनका प्राचीन होना निश्चय ही सिद्ध है। जय माता की 
मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़ पथिक

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