कीठम झील (सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य)- रुनकता ,सूरदास जी को समर्पित

उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद की बात करें तो लोग ताजमहल, लालकिला और फतेहपुर सीकरी का ही नाम बता सकते हैं किंतु हम आपको आगरा में प्राकृतिक स्थल के बारे में बताएंगे। जी हाँ! प्राकृतिक स्थल , इसका नाम है -
सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य या कीठम झील।
सूर श्याम मन्दिर, रुनकता,आगरा


भौगोलिक स्थिति-
                     यह स्थल आगरा से 22 किलोमीटर, सिकन्दरा से 12 और रुनकता रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर है।
कीठम झील, रुनकता ,आगरा

स्थल के बारे में-
                   यहाँ आपको एकदम शांत वातावरण मिलेगा , एक ओर झील और दूसरी ओर यमुना का प्रवाह। चारों ओर प्राकृतिक वन।
कीठम झील का सुन्दर दृश्य

वर्ष 1991 में इसे अभ्यारण्य घोषित किया गया। अभयारण्य का क्षेत्रफल झील के लगभग 2 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल को मिलाकर लगभग 7 वर्ग किलोमीटर है।
गऊ घाट पर यमुना का सुन्दर प्रवाह             


भालू संरक्षण केंद्र-
                      अभ्यारण्य में एक भालू संरक्षण केन्द्र भी है। यहाँ के लिए भी प्रवेश द्वार पर बने काउंटर से टिकट अवश्य ले लें।
भालू संरक्षण केन्द्र, कीठम झील, आगरा            


सूरदास जी को समर्पित-
                     जैसा पहले ही कहा कि इसे सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य भी कहते हैं क्योंकि सूरदास जी ने विहार किया। इस अभ्यारण्य में विद्यालय, छात्रावास, सूर श्याम मन्दिर, सूरदास स्मारक और एक आश्रम भी बना हुआ है।
सूरदास कूप                         

सूरदास की प्रतिमा, सूर कुटी, आगरा।                   

सूरदासजी की भावना बैठक                     
 यह भावना बैठक सूरदास जी के गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु जी की है, यहीं पर सूरदास जी को दीक्षा प्राप्त हुई।
हिन्दी के अमर कवि महात्मा सूरदासजी की विशाल प्रतिमा             
एक शिलालेख        

सूरदास जी का कुआँ

भावना बैठक में लगा हुआ चित्र    
यह चित्र सूरदास जी के पथ प्रदर्शक महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के एक पुराने चित्र पर आधारित है। इसे पद्मविभूषण से अलंकृत, साहित्य वाचस्पति एवं हिन्दी के अनन्य सेवक स्व० श्री चतुर्वेदी(१८९३-१९९०) ने लखनऊ के प्रसिद्ध चित्रकार श्री अजमत से बनवाया था।


सूरश्याम मन्दिर,आगरा       

कृपया ध्यान दें--
                   यहाँ भ्रमण के लिए अभ्यारण्य तथा भालू संरक्षण केन्द्र के लिए अलग अलग टिकट लेनी पड़ती है; इसलिए पहले ही टिकट ले लेनी चाहिए क्योंकि प्रवेश द्वार से कुछ दूरी पर यह स्थल है और यदि आपने टिकट नहीं ली तो अंदर किसी भी प्रकार नहीं घूम पाएंगे। और टिकट लेने के लिए प्रवेश द्वार पर ही आना होगा जिससे आपका बहुत समय नष्ट हो जाएगा।
प्रवेश द्वार       सूर सरोवर पक्षी विहार(कीठम झील)

वैसे यदि आप भालू देखने के लिए टिकट नहीं ले पाये हों तो कोई बात नहीं। आप केन्द्र के बराबर वाले मार्ग पर कुछ दूर चलें । आपको एक वॉच टावर दिखाई देगा। बस उसी पर चढ़ जाएं। वहाँ से भी आप केन्द्र के अंदर भालू विचरण करते देख सकते हैं लेकिन यदि भाग्य ने आपका साथ दिया तो।
अभ्यारण्य के अन्दर का दृश्य        


बन्धु भीमसेन जी(भरतपुर) वालों के साथ, छात्र 

कान्हा जी की प्यारी गौ



मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़ पथिक


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