कुम्भ महापर्व, प्रयागराज- सर्वसिद्धिप्रद: कुम्भ (2019)

भारतीय संस्कृति में तीर्थ स्थलों का अपना विशेष महत्व है, इसलिए यह भारतभूमि पग पग पर तीर्थस्थलों से भरी हुई है।
इन स्थानों पर आप एक "लघु भारत" देख सकते हैं।विभिन्न भाषा, विभिन्न वेशभूषा आदि को आप एक साथ देख सकते हैं।
आज हम सभी तीर्थों का राजा " तीर्थ राज प्रयाग" के दर्शन कराएंगे। यहाँ का बहुत ही विशेष महत्व है, इसलिये मैं अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से 2 मार्च, 2019 को रात्रि में प्रयागराज के लिए प्रस्थान किया। हम दोपहर बाद प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक थी, किन्तु कोई समस्या वाली बात नहीं थी। इस बार का कुम्भ दिव्य व भव्य था।
प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर                                    

प्रयागराज रेलवे स्टेशन का एक दृश्य                          

भौगोलिक स्थिति:-
                      उत्तर रेलवे का प्रमुख जंक्शन होने के कारण प्रयागराज देश की सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। अलीगढ़ से इसकी दूरी 501 किलोमीटर, आगरा से 533, दिल्ली से643 है।

                     
प्रयागराज रेलवे स्टेशन के पैदल पुल पर                          
प्रयागराज नाम क्यों व महत्व:-
                                    जिस तरह से सनातन संस्कृति अनादि है उसी प्रकार प्रयागराज की महिमा का भी कोई अन्त नहीं।
सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने पर यहाँ प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के कारण "प्र" अर्थात विशेष और "याग" अर्थात यज्ञ  से प्रयाग  हुआ।

अनेक पौराणिक ग्रंथों में कहा गया है कि उत्कृष्ट यज्ञ और दान दक्षिणा आदि से सम्पन्न स्थल देखकर भगवान विष्णु एवं भगवान शिव आदि ने इसका नाम प्रयागराज रख दिया।

इसका महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है कि यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है और यहीं से अन्य नदियां अपना अस्तित्व गङ्गा में विलीन कर देती हैं। इसके पश्चात केवल गंगा प्रवाहित होती हुई सागर से मिलजाती हैं।
                           संगम तट पर स्नान के लिए श्रद्धालु

प्रयागराज में कुंभ का योग:-
                                     तीर्थराज प्रयाग में दो तिथियों पर कुम्भ पर्व होता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार, मकर राशि में सूर्य और चंद्रमा की युति तथा वृष राशि में बृहस्पति की उपस्थिति में प्रयागराज में कुंभ योग बनता है। यह ग्रह स्थिति माघ मास की अमावस्या के दिन बनती है।
दूसरी तिथि मकर राशि में सूर्य और चन्द्र तथा मेष राशि में बृहस्पति होने पर कुम्भ का आयोजन होता है।

निम्न दोनों छायाचित्रों में आगामी वर्षों में होने वाले कुम्भों के वर्णन है जिसको सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित"प्रयागराज कुम्भ-2019, कुम्भ मेला:एक परिचय" से साभार लिया गया है-----
महाकुम्भ       

कुम्भ       

                                    कुम्भ की समुद्र मंथन वाली कथा सभी को विदित है अतः यहाँ विस्तार भय से नहीं लिख रहा हूँ। प्रत्येक बारह वर्ष पर कुम्भ पर्व आता है।प्रत्येक बारह वर्ष पर आने वाले कुम्भ पर्व को शासन स्तर से"महाकुम्भ" और छः वर्ष पर आने वाले कुम्भ पर्व को "कुम्भ" की संज्ञा दी गयी है।

प्रयागराज के अतिरिक्त भारत में हरिद्वार, उज्जैन व नासिक में भी कुम्भ का आयोजन होता है।
मार्ग में रुद्राक्ष द्वार            

संगम की ओर जाने वाले मार्ग में नन्दी द्वार       

कुम्भ क्षेत्र में टेंट सिटी का विहंगम दृश्य    

कुम्भ क्षेत्र में मनु

शाही स्नान के पश्चात        


माघ स्नान मेला:-
                     प्रत्येक वर्ष प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान के लिए माघ-मेला लगता है। बहुत से तीर्थयात्री गंगा और यमुना के मध्य मासपर्यंत "कल्पवास"करते हैं।
त्रिवेणी संगम पर स्नान के बाद         

संगम तट पर रात्रि दृश्य            

कुम्भ का अद्भुत आनन्द                 


शाही स्नान का पुण्यफल:-
                             कुम्भ का आयोजन वर्ष 2019 में मकर संक्रांति से लेकर महाशिवरात्रि(04 मार्च, 2019) तक किया गया।
इस पर्व में छः प्रमुख स्नान पर्व होते हैं- जैसे- मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर्व प्रमुख हैं।
मैंने महाशिवरात्रि पर्व पर शाही स्नान का पुण्य फल प्राप्त किया। इसके लिए मैं एक दिन पहले ही प्रयागराज पहुंच गया था।
माँ गङ्गा के पावन जल में        

महापुण्यदायक गङ्गाजल में स्नान                       

शंकर विमान मण्डपम मन्दिर:- 
                                    गंगा के पावन तट पर त्रिवेणी बांध में आप यदि खम्बे वाले मन्दिर के बारे में पूछेंगे तो लोग आपको शंकर विमान मण्डपम की ओर संकेत कर भेज देंगे। यह अपने प्रकार का अनोखा मन्दिर प्रयागराज की गरिमा को ऊंचाइयां देता है। इसका निर्माण कांची कामकोटि पीठम के शंकराचार्य स्वामी चन्द्रशेखर सरस्वती की देखरेख में हुआ। इस मन्दिर में काले पत्थर से निर्मित देवी देवताओं की अनेक सुन्दर मूर्तियां स्थापित हैं। यह मन्दिर दक्षिण भारत की शैली में है।

                                  विमान मण्डपम मन्दिर का दृश्य

देवप्रतिमाओं का पूजन करते हुए
           

भगवान परशुराम जी का पूजन करते हुए    

मन्दिर में स्थापित प्रतिमा के साथ    

शंकर विमान मण्डपम मन्दिर परिसर में        

शंकर विमान मण्डपम का एक दृश्य    


भव्य कुम्भ - दिव्य कुम्भ:-
                                इस बार का कुम्भ बहुत ही व्यवस्था पूर्ण रहा। उत्तर प्रदेश सरकार की एक उपलब्धि के रूप में इसे देख सकते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखें तो शासन का प्रबंधन सफल रहा।

कैसे पहुंचे:-
               प्रयागराज रेलवे स्टेशन देश के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। अलीगढ़ व दिल्ली से आप महानन्दा एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस, हावड़ा कालका एक्सप्रेस आदि से सीधे पहुंच सकते हैं।
              प्रयागराज रेलवे स्टेशन से आप टेम्पो से कुम्भ स्थल तक जा सकते हैं। वहाँ से आपको कुम्भ क्षेत्र में पैदल यात्रा ही करनी होगी।
सामान्य दिनों में आप टैक्सी, टेम्पो आदि से सुगमतापूर्वक यात्रा कर सकते हैं।

कब जाएं:-
                 वैसे तो आप वर्षभर कभी भी जा सकते हैं किन्तु अगस्त से मार्च तक का समय भ्रमण के लिए उपयुक्त है।



जिससे यह कुम्भ भव्य व दिव्य बना।
इसी यात्रा के कुछ छायाचित्र नीचे दिए जा रहे हैं।



त्रिवेणी संगम स्थल पर मनु

पीताम्बर धारी कितना सुंदर

प्रातः कालीन स्नान त्रिवेणी संगम पर

प्रयागराज कुम्भ में जलयान    

प्रशासनिक व्यवस्था      

रेलवे स्टेशन पर पूछताछ केन्द्र   

                           प्रयागराज में नौकाओं का एक दृश्य


जय माँ गंगा
जय प्रयागराज
जय भारत


मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़पथिक

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Bhut sundar guruji
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पटना पक्षी विहार- कलरव करते पक्षियों का बसेरा

कात्यायनी देवी मन्दिर, छतरपुर, दिल्ली- माँ दुर्गा के छठे रूप को समर्पित