कात्यायनी देवी मन्दिर, छतरपुर, दिल्ली- माँ दुर्गा के छठे रूप को समर्पित

  1. मैंने अपनी संस्कृत मित्र मंडली के साथ "प्रथम विश्व संस्कृत सम्मेलन" में भाग लेनेे के लिए आठ नवम्बर 2019 को अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से सायं काल रेल द्वारा दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। रेेेल की यह यात्रा बहुत ही आनन्ददायक रही। हम निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरे। वहाँ से संस्कृत भारती के वाहन द्वारा ही छतरपुर मन्दिर पहुँच गये। पंजीकरण करा कर रात्रि विश्राम के लिए हमें  लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ भेज दिया गया।

                                  प्रातः काल पुनः हम सभी संस्कृत सम्मेलन में भाग लेने पहुंच गए। सम्मेलन के विषय में ब्लॉग की किसी अन्य पोस्ट में बताऊंगा।

अभी तो हम बात करेंगे- माँ दुर्गा के छठे रूप को समर्पित छतरपुर मन्दिर के बारे में---
कात्यायनी मन्दिर, दिल्ली

भौगोलिक स्थिति:-

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ मन्दिर गुरुग्राम-महरौली मार्ग पर स्थित है। आप दिल्ली से बस, रेल या मेट्रो रेल से भी यहाँ पहुंच सकते हैं। मन्दिर की दूरी छतरपुर मेट्रो स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर है। कुतुबमीनार की दूरी यहाँ से मात्र चार किलोमीटर है ।
श्री महिषासुरमर्दिनि उत्सव मण्डपम, दिल्ली

मन्दिर की स्थापना व स्थापत्य:-
                         माँ दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को समर्पित यह मन्दिर दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है। इसकी स्थापना कर्नाटक के सन्त बाबा नागपाल जी ने वर्ष 1974 में की  थी। मुख्य मन्दिर में माँ कात्यायनी के सुन्दर विग्रह के दर्शन आप कर सकते हैं ।
सुन्दर स्थापत्य, छतरपुर मन्दिर, दिल्ली

इसके साथ ही माँ का चाँदी का सिंहासन, शयन कक्ष और माँ की भोजन पटल (डाइनिंग टेबल) के दर्शन भी किये जा सकते हैं। सम्पूर्ण मन्दिर का स्थापत्य शैली बहुत ही उत्तम है। संगमरमर के द्वारा निर्मित मन्दिर में हुई जाली का काम देखने के योग्य है। यहाँ एक प्राचीन वृक्ष भी है, जिस पर धागे बांधकर लोग मन्नत माँगते हैं।
माँ का भव्य शयनकक्ष, छतरपुर मन्दिर, दिल्ली

                                 शयन कक्ष
बाबा नागपाल जी की प्रतिमा,छतरपुर मन्दिर, दिल्ली


परिसर के अन्य मन्दिर:-
                    इस मन्दिर परिसर में लगभगबीस छोटे बड़े मन्दिर हैं। मुख्य मन्दिर से सड़क मार्ग केे दूसरी ओर प्रथम तल पर "गौरीनागेश्वर मन्दिर" व भूतल पर बाबा नागपाल जी की समाधि है ।






 विशाल त्रिशूल:-
                      इसी परिसर में घूमते हुए आप देखेंगे कि एक बहुत बड़ा त्रिशूल देखेंगे, जो कि एक विशाल कच्छप पर टिका है।



रामभक्त हनुमान जी:-
                        
                        इसी परिसर में आप एक विशाल हनुमानजी की प्रतिमा को देखेंगे। यहाँ का सायं कालीन लेजर शो बहुत आकर्षक होता है।
जय श्री हनुमान

विशाल द्वार बड़े ताले के साथ:-
                       परिसर में घूमते हुए हमें हमारी संयोजिका डॉ सुदीप जी ने बताया कि यहाँ पर एक विशाल द्वार बना हुआ है जिस पर एक बड़ा ताला लटका हुआ। लेकिन विश्व संस्कृत सम्मेलन के कारण इसे इस बार मैं न देख सका।
डॉ सुदीप जी बड़े द्वार के समक्ष      

वविशाल द्वार     


विशाल घण्टा:-
                   मार्कण्डेय मण्डपम के निकट ही आकर्षक उद्यानों में ही आप एक विशाल घण्टा देख सकते हैं।


इस विशाल मन्दिर में भगवान विष्णुजी, शिवजी, गणेशजी, और भगवान राम सीता जी के मन्दिर भी हैं। इसके साथ ही सन्त बाबा नागपाल संग्रहालय, रथ घर , यज्ञ शाला , धर्मशाला, डिस्पेंसरी और स्कूल भी है।
लक्ष्मी विनायक मन्दिर, छतरपुर मन्दिर, दिल्ली













इसके साथ ही मैं अपने लेख को विराम देता हूँ।

जय माँ कात्यायनी

मनोज कुमार झा"मनु"
घुमक्कड़ पथिक

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
अति उत्तम,यादें ताज़ा हो गयी भ्राता श्री ।

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